पुरुषों को अपराधी बनाने वाले कानूनों को समाप्त करने का समय आ गया है

पुरुषों को अपराधी बनाने वाले कानूनों को समाप्त करने का समय आ गया है । इस लेख के माध्यम से इस बात को समाज की मुख्यधारा में उठाने का प्रयास किया गया है कि भारतीय दंड विधान के 498ए और घरेलू हिन्सा कानून की वजह से पुरुषों को अपराघी बनाया जा रहा है । चूंकि इनका व्यापाक पैमाने पर दुरुपयोग रहा है इसलिये इसे समाप्त करने की जरूरत है । बताते चलें की इस लेख के मूल में हैदराबाद निवासी प्रो. गुरुप्रसाद की अपने दोनों बेटों को मारकर स्वयं भी आत्महत्या करने की घटना रहा है । प्रो. गुरुप्रसाद का पत्नी से तलाक का मुकदमा चल रहा था । जिसके बीच उन पर दहेज उत्पीड़न का फर्जी मुकदमा भी दर्ज कराया गया । मरने से पूर्व अपने सूसाईड नोट में प्रो. गुरुप्रसाद ने केन्द्रीय गृह मन्त्री जो पत्र लिखकर इन कानूनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने का अनुरोध किया था । साथ ही वह लिख कर गये हैं कि इन जान लेवा कानूनों से तंग आकर वे आत्म हत्या कर रहें हैं । साथ ही बताते चलें कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 65000 पुरुष इन कानूनों से तंग आकर अपनी जान ले रहे हैं  ।

http://ibnlive.in.com/news/time-to-scrap-laws-which-turn-ordinary-men-into-criminals/505162-3.html

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