Men asking justice from Women’s Commission

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दिनांक 14.04.2015 को हिदुस्तान के ऋषिकेश संस्करण में छपी यह खबर तो बस एक बानगी भर है । वास्तव में हर पुरुष इस तुर्रे के निचे दबा होता है कि ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ । जितना भी दर्द छलक कर बाहर आया है वो तब हुआ होगा जब सारे आंसू भी सूख गए होंगे । आप स्वयं अपने पर बीते तो कल्पना कर के देखिये की मर्द को रोने के लिए कितने गहरी प्रताड़ना सहनी पड़ी होगी ।। मर्द का दर्द पहिचानिए । उसके प्रति भी सम्वेदनशील बनिए ।
औरतें भी अपराधी होती हैं इस बात स्वीकार्यता अभी समाज में कम है । पर अब बात निकली है तो दूर तलक जाए, ऐसा हमारा प्रयास है ।

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