Author: Gender Justice

A humble effort to highlight gender discrimination and gender specific crime against men. There's a lot of it going on everywhere at school, workplace, society and in families too. It's perpetuated by state and judiciary, tacitly supported by society and mocked by all. The bottom-line that MEN DO FEEL THE PAIN, largely goes unheard. This is an attempt to give voice to that pain in men.

दहेज प्रताड़ना के झूठे मामले दर्ज कराने वाले अब सावधान!

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दहेज प्रताड़ना के झूठे मामले दर्ज कराने वाले अब सावधान!

Posted on: March 03, 2011 03:56 AM IST | Updated on: March 03, 2011 03:56 AM IST

नई दिल्ली। दहेज प्रताड़ना के झूठे मामले दर्ज कराने वाले हो अब सावधान हो जाएं, अगर अब आपने झूठे दावे किए तो आयकर विभाग आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। जी हां, ऐसे ही एक मामले में आयकर विभाग ने वसूली के लिए एक ऐसे आदमी को नोटिस जारी किया है। इस आदमी ने अपने दामाद के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। जांच में आयकर विभाग ने पाया कि उसने जितना खर्च करने का दावा किया है, वो उसकी घोषित आय से काफी ज्यादा है।

दरअसल शादी के तीन साल बाद ही शोनी कपूर के खिलाफ उनकी पत्नी ने दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा दिया। उनकी पत्नी के पिता ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी में 13 लाख रुपए खर्च किए थे, जो उन्हें वापस दिलाए जाएं। शोनी कपूर ने साल 2008 में आयकर विभाग के पास शिकायत की कि उनके ससुर की आय इतनी थी ही नहीं कि वो शादी में 13 लाख रुपए खर्च कर सकें। करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद अब जाकर आयकर विभाग ने उनके ससुर को नोटिस जारी कर दो लाख 21 हजार रुपये जमा कराने को कहा है। साथ ही निर्देश जारी किया है कि क्यों ना उनसे जुर्माना वसूलने के लिए कार्रवाई शुरू की जाए।

दरअसल शोनी कपूर को दहेज प्रताड़ना के आरोप में जेल और पुलिस हिरासत जाना पड़ा। नौकरी छूट गई। परिवार शहर छोड़कर दिल्ली आ गया। इतनी परेशानी भुगतने के बाद उन्होंने इस लड़ाई को सही अंजाम तक पहुंचाने की ठान ली। अभी उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस लंबित है। लेकिन उनकी माने तो पहली जीत उन्हें मिल गई है।

साल 2009 में देश भर में दहेज प्रताड़ना के करीब 90 हजार मुकदमे दर्ज हुए। पिछले कुछ सालों पर नजर डालें तो हर साल दहेज प्रताड़ना के मामलों में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती है। दर्ज हुए मुकदमों में से महज दो फीसदी में ही सजा होती है। यानी 98 फीसदी मामलों में या तो समझौता हो जाता है या फिर वो फर्जी पाए जाते हैं। साफ है कि समय आ चुका है कि इस कानून में बदलाव कर समाज में बदलाव लाया जाए।

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आप इस लड़के को बचाना चाहेंगे, या इसकी आत्महत्या के बाद एक और कैंडल मार्च निकालना चाहेंगे?

आज हमारा देश एक ऐसी स्थिति से गुजर रहा है जहां एक तरफ तो महिला को, पत्नि, मित्र, प्रेमिका, लिव-इन पार्टनर, यहाँ तक कि एक वैश्या के रूप में भी सशक्ति किया जा रहा है और दूसरी तरफ एक माँ, बहन, भाभी, ताई, चाची, बूआ आदि के रूप में उन्हें महिला ही नहीं माना जाता।

जब यहाँ छद्म महिला सशक्तिकरण इस कदर सर चढ़ कर बोल रहा है कि नारिवादी शक्तियों के दबाव में सरकार बिना कुछ सोचे समझे कानून बनाने पर आमादा है, तो यहाँ एक पुरुष का यह उम्मीद करना कि उसे भी न्याय मिल सकता है, बेमानी है, एक धोखा है।

एक लड़के ने एक लड़की से इस कदर प्यार किया कि अपना सबकुछ लुटा दिया, परन्तु उस लड़की ने इस लड़के का इस कदर शारीरिक, आर्थिक और मानसिक शोषण कर धोखा दिया कि उसे लगने लगा कि अब आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता शेष नहीं…

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बलात्कार कानून बना अवैध धन उगाही का धन्दा !

HH Lko 12 Mar 2016

भारत देश में बलात्कार कानून अवैध धन उगाही का धन्दा बन गया है । लखनऊ के हिन्दुस्तान अखबार में 12.03.2016 को प्रकाशित यह खबर पढि़ये । महिला चाहे जितनी बार भी फ़र्जी मुकदमा लिखाये, चाहे जितने निर्दोष लोगों को फ़साये और अवैध  धन उगाही करे । पूरी कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था इस वसूली के धन्दे में उसके साथ खड़ी नजर आती है । ऐसी महिलाओं को सजा देने की मांग पर बड़े – बड़े भाग खड़े होते हैं । इसी कारण महिला कानूनों का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है और देश गर्त में जा रहा है ।

क्या पुरूष ऐसा करके सुरक्षित रह सकते हैं ?

HH Lko 07 March 2016अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर (07.03.2016 को) लखनऊ में प्रकाशित यह खबर देखिये । सवाल यह नहीं है एक नवविवाहिता भाग गयी । सवाल यह है कि यही काम अगर किसी पुरुष ने किया होता तो उसका क्या हष्र होता ?

सबसे पहले तो दहेज और घरेलू हिन्सा के पूरे पैकेज मुकदमें दर्ज होते । उस पुरुष (पति) के सारे खानदान को जेल होती । समाज में बदनामी और लम्बी सालों – साल चलने वाली अदालती झेलनी पड़ती । गुजारा भत्ता आदि देने में वो फ़कीर बन सकता था । सारे देश के अखबार और खबरिया चैनल उसके पीछे पड़ जाते और उस पुरुष को वहशी, दरिन्दा आदि उपमाओं से सुशोभित कर देते ।

पर चूंकि यह पुनीत कार्य एक देवी जी ने किया है, उन्हे कोई सजा तो होना दूर की बात है वरन इस पर कोई कार्यवाही भी नहीं होगी । जय हो भारत की कानून और व्यवस्था । अन्धेर नगरी – चौपट राजा !

महिला दिवस पर विशेष ! साधुवाद दीपिका.

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पुरुष अधिकारों के लिये आवाज उठाने वाली देश की कुछ चुनिन्दा महिलाओं में दीपिका का नाम शुमार है । आपके कामों को व्यापक स्तर पर पहचान और सरहाना मिली है । साधुवाद दीपिका ! पुरुषों के हक में आवाज उठाने के इनके अनूठे कार्य को राजस्थान पत्रिका ने खास महिला दिवस पर प्रोत्साहन दिया ।

A woman can get away by paying Rs. 10000

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Shame on Indian laws and justice ! But, that’s real India!

 A woman can get away by paying only Rs. 10,000 ($145) for a serious offence of fooling the court and seeking non-admissable remdy. There is no consideration that she has even destroyed a man’s life.  This is banana justice of a banana republic.

Had it been any man doing the same, the entire world have been out to demand death penalty for him. Down with Indian laws that openly promote misuse by women. Shame once again. This news item was published at:

http://www.dnaindia.com/mumbai/report-woman-fined-rs10000-for-perjury-by-court-for-lying-under-oath-2186581

Happy Real Women’s Day !

 

Separating the REAL WOMEN from the lot!

माताएं एवं बहिने महिला नहीं

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