Author: Gender Justice

A humble effort to highlight gender discrimination and gender specific crime against men. There's a lot of it going on everywhere at school, workplace, society and in families too. It's perpetuated by state and judiciary, tacitly supported by society and mocked by all. The bottom-line that MEN DO FEEL THE PAIN, largely goes unheard. This is an attempt to give voice to that pain in men.

Voice of underpriveledged men

Watch this video to understand some of the pain, men suffer.

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Central Government rules for Right to Information Rules

These are rules to be followed by the Departments of Central Government in India.

These rules are framed by MINISTRY OF PERSONNEL, PUBLIC GRIEVANCES AND PENSIONS (India) and are binding on all establishments of Central Government in India.

rti rules

Please click this link below to download the rules in Pdf format.

RTIRules2012

बेटी के प्रेमी को खौलते पानी में उबालकर मार डाला

जश्न मनाओ कि एक लड़की के माता पिता ने अपने बेटी के प्रेमी को धोखे से घर बुला कर उसे अधमरा किया और फ़िर खौलते पानी में उल्टा लटाकर, उबाल कर  मार डाला । घटना उत्तर – प्रदेश के आजमगढ़ जिले की है जो कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचते – पहुंचते अखबार के अठ्ठाहरवें पन्ने पर पहुंच गयी । एक लड़का ही तो मरा है । उसकी जिन्दगी कोई मोल तो होता नहीं । इसकी जगह कोई महिला मरी होती तो देश-विदेश के अखबार और चौबीस घन्टे के खबरिया चैनल चीख – चीख के पूरा देश सिर पे ऊठा लिये होते । पुरुष के न तो कोई मानवाधिकार होते हैं और न ही उसको व्यवस्था से कोई न्याय मिलता है । यही भारत है । We want Justice चिल्लाने का एकमात्र ठेका तो महिला अधिकारों के झण्डाबदरों को मिला हुआ है ।

HH Azamgarh 28 Feb 2016HH Azamgarh 28 Feb 2016 part 2

DAMAN’s protest against ‘marital rape’ receives peoeple’s support

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DAMAN, a civil society organisation staged a one day situations at Bada chauraha, Kanpur on 20.02.2016, to make the people aware on the issues of proposed marital rape Law.  It would criminalize the conjugal relations between husband and wife, at the mercy of wife.

‘दामन’ संस्था ने ‘वैवाहिक बलात्कार’ का किया विरोध

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तस्वीरें गवाह हैं की जब 20 फरवरी 2016 को कानपुर के बड़े चौराहे पर ‘दामन’ संस्था ने प्रस्तावित ‘वैवाहिक बलात्कार’ कानून का विरोध किया तो उन्हें अभूतपूर्व जन समर्थन मिला । जन-जागरण के लिए आयोजित इस कार्यक्रम के मर्म को न सिर्फ लोगों ने सराहा बल्कि ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर बना कर दामन की इस मुहीम से जुड़े । बड़ी संख्या में महिलाओं से इस हस्ताक्षर अभियान में सहभागिता की । क्या खुद को देश का रहनुमा कहने वाले सुन और देख रहें हैं ?

राजस्थान महिला आयोग ने फ़र्जी केस के लिये दरवाजे बन्द किये

एक सरहानीय पहल ! राजस्थान महिला आयोग ने सार्वजनिक रूप से माना की महिलाओं के द्वारा फ़र्जी मुकदमें लिखाये जाते हैं । साथ ही एक जिम्मेदार संस्था के रूप में फ़र्जी केस करने वालीयों के लिये महिला आयोग के दरवाजे बन्द किये । (खबर – राजस्थान पत्रिका, 21 फ़रवरी 2016 के हवाले से)

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पुरानी मांगो को दहेज के लिये हत्या नहीं माना जायेगा – सुप्रीम कोर्ट

दैनिक हिन्दुस्तान में दिनांक 17 फ़रवरी 2016 को छपी यह खबर अपनी चुगली खुद कर रही है । सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि हर केस जहां लड़की की मौत हो गयी हो उसे दहेज के लिये हत्या नहीं माना जायेगा । जिस प्रकार महिला कानूनों का खुले आम दुरुपयोग हो रहा है, उसके कारण यह एक महत्वपूर्ण फ़ैसला है । हत्या, के ठीक पहले की गयी दहेज की मांग को ही ’दहेज – हत्या’ (भारतीय दण्ड विधान की धारा 304बी) का कारण माना जायेगा ।

 HH LKo 17 Feb 2016

महिला के हाथों एक पुरूष मरा है, जशन मनाओ!

फ़िर चहका फ़र्जी महिला उत्थान, जाती है तो जाये, पुरुष की जान ।
 
आओ जशन मनाएं । एक पुरुष मरा है, वो भी महिला कानूनों के दुरुपयोग के कारण । फ़र्जी दहेज के मुकदमें की धमकी के कारण आत्महत्या करने वाले इस पुरूष की मौत की ’रिपोर्ट’ भी यदि पुलिस दर्ज कर ले तो बड़ी बात होगी । खबर – दैनिक जागरण, कानपुर के हवाले से – दिनांक 17 फ़रवरी 2016 को प्रकाशित |
Dainik Jagran Kanpur 17 Feb 2016

जब मालूम हो गया की महिला फंसा रही है तो उसे जेल क्यों नहीं भेजा ?

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