कार्यक्षेत्र में अत्याचार / Harasement at Workplace

अगर यह जिलाधिकारी न होते हो क्या सफाई देने का मौक़ा मिलता ?

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हिंदुस्तान – लखनऊ । दिनांक 05.04.2015 ।
महिला कानूनों दुरूपयोग का यह आलम है कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है । सभी आम और ख़ास, पुरुष निशाने पर हैं । इस खबर में अगर आरोपी पुरुष जिलाधिकारी नहीं होता तो भी क्या उसे अपनी सफ़ाई देने का मौका मिलता ? जो रवायत इस देश में चल रही है उसमे तो बिना सच्चाई जाने सिर्फ आरोप मात्र लग जाने से ही पुरुषों को दोषी मान लेने का चलन है ।  नौकरी से निलम्बन, पुलिस – कचहरी के चक्कर और समाजिक तिरस्कार सब एक साथ मिलता है ।

आज कार्यालय में भी महिला कानूनों का दुरूपयोग खुलेआम हो रहा है । आफिस की हर छोटी – बड़ी बात कब ‘महिला उत्पीड़न’ और ‘कार्य स्थल पर यौनिक अत्याचार’ के मुकदमें में बदलकर लौटेगी,  इसी भय में भारत के हर कार्यालय में लोग भयाक्रांत हैं । उससे भी बड़ी समस्या यह है की जब यह मुकदमें झूठे साबित होते हैं तो फर्जी शिकायत करने वाली शातिर महिला पर कोई कार्यवाही नहीं होती । कानून में फर्जी शिकायत करने वालों पर दण्ड का प्राविधान नहीं होने की कमी के कारण महिलाओं में फर्जी मुकदमें दर्ज कराने की प्रवृत्ति की बाढ़ आ चुकी है । समाज में यह कुरीति एक विकराल रूप ले चुकी है ।

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अब कार्यक्षेत्र में भी महिला कानूनों का दुरुपयोग

किसी महिला को काम पर रखने से पहले दस बार सोंचे । किसी दिन छुट्टी न देने पर या वेतन न बढ़ाने पर नियोक्ता पर महिला उतपीड़न का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया ज सकता है । यकीन न हो तो हिन्दुस्तान (हिन्दी), लखनऊ में छपी इस खबर को देखिये ।  अगर किसी महिला को नौकरी पर रखा जाता है तो किसी दिन छुट्टी न मिलने पर या वेतन नहीं बढ़ाये जाने पर नियोक्ता के उपर महिला उप्त्पीड़न और यौन शोषण के सोचें – समझे  फर्जी मुकदमें दर्ज हो सकतें हैं ।

किसी महिला को काम पर रखने से पहले दस बार सोंचे । किसी दिन छुट्टी न देने पर या वेतन न बढ़ाने पर नियोक्ता पर महिला उतपीड़न का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया ज सकता है ।

Female medical student files fake rape case on former boyfriend

NAV BHARAT TIMES, Lucknow. Date: 15.08.2014

NAV BHARAT TIMES, Lucknow. Date: 15.08.2014

प्यार में दिल टूटा तो पूर्व प्रेमी पर लगा दिया बलात्कार का आरोप ! भई वाह ! यही है असली इण्डिया ? जांच हुई लड़का बरी हुआ । पर उसकी अस्मिता और सुरक्षा का कोई मोल नहीं । फर्जी  आरोप लगाने वाली लड़की को कोई सजा क्यों नहीं ? झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाली महिलाओं की पहचान एक महिला की तरह छुपाने का क्या मतलब ? उन्हे भी एक अपराधी के समान समाज के सामने क्यों नहीं पेश किया जाता ?