पुरुषों के प्रति घरेलू हिन्सा / Domestic Violence on Men

A woman can get away by paying Rs. 10000

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Shame on Indian laws and justice ! But, that’s real India!

 A woman can get away by paying only Rs. 10,000 ($145) for a serious offence of fooling the court and seeking non-admissable remdy. There is no consideration that she has even destroyed a man’s life.  This is banana justice of a banana republic.

Had it been any man doing the same, the entire world have been out to demand death penalty for him. Down with Indian laws that openly promote misuse by women. Shame once again. This news item was published at:

http://www.dnaindia.com/mumbai/report-woman-fined-rs10000-for-perjury-by-court-for-lying-under-oath-2186581

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महिला के हाथों एक पुरूष मरा है, जशन मनाओ!

फ़िर चहका फ़र्जी महिला उत्थान, जाती है तो जाये, पुरुष की जान ।
 
आओ जशन मनाएं । एक पुरुष मरा है, वो भी महिला कानूनों के दुरुपयोग के कारण । फ़र्जी दहेज के मुकदमें की धमकी के कारण आत्महत्या करने वाले इस पुरूष की मौत की ’रिपोर्ट’ भी यदि पुलिस दर्ज कर ले तो बड़ी बात होगी । खबर – दैनिक जागरण, कानपुर के हवाले से – दिनांक 17 फ़रवरी 2016 को प्रकाशित |
Dainik Jagran Kanpur 17 Feb 2016

जब मालूम हो गया की महिला फंसा रही है तो उसे जेल क्यों नहीं भेजा ?

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Much needed gesture in present time

Supreme Court to examine possibility of Domestic Violence on Men

Men asking justice from Women’s Commission

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दिनांक 14.04.2015 को हिदुस्तान के ऋषिकेश संस्करण में छपी यह खबर तो बस एक बानगी भर है । वास्तव में हर पुरुष इस तुर्रे के निचे दबा होता है कि ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ । जितना भी दर्द छलक कर बाहर आया है वो तब हुआ होगा जब सारे आंसू भी सूख गए होंगे । आप स्वयं अपने पर बीते तो कल्पना कर के देखिये की मर्द को रोने के लिए कितने गहरी प्रताड़ना सहनी पड़ी होगी ।। मर्द का दर्द पहिचानिए । उसके प्रति भी सम्वेदनशील बनिए ।
औरतें भी अपराधी होती हैं इस बात स्वीकार्यता अभी समाज में कम है । पर अब बात निकली है तो दूर तलक जाए, ऐसा हमारा प्रयास है ।

Man forced to live in bus stop by wife gets divorce

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यही काम अगर किसी पति ने किया होता तो क्या सिर्फ तालाक देकर अदालते उसकी जान बख्श देती ? लिंग भेदी कानूनों के विरुद्ध आवाज बुलन्द करें ।

अब भी सबूत चाहिये महिला कानूनों के दुरूपयोग का ?

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यह कौन सा कानून है जिसमे घर परिवार को बर्बाद करने का काम किया जाता है | क्या माँ – बाप को अपने साथ रखना कानूनन जुर्म है ? जिसके लिए फर्जी मुकदमों में जेल भेजने की घमकियाँ मिलती रहे ? क्या यही है असली महिला सशक्तिकरण  ? हर छोटी बडी बात पर  दहेज और घरेलु हिंसा में फंसाने की धमकी ।  और जाने लाखों गुमनाम लोग रोज तिल – तिल कर मर रहे हैं । जिसके ऊपर से यह तुर्रा की मर्द को दर्द  नही होता । महिला कानूनों के दुरुपयोग के रथ पर सवार हो रहे इस छ्द्म सशक्तिकरण का जो भी अंत होगा वो तो समय बतायेगा पर दु:ख यह है कि न जाने कितने ही पुरुष रोज अपने प्राण त्याग रहे हैं और उनके परिवार एक अनजाने भय के साये में रोज मर रहे हैं ।

बहू ने भाई के साथ मिलकर तोड़ीं ससुर की हड्डियां

http://www.delhincr.amarujala.com/feature/crime-bureau-ncr/daughter-in-law-attacks-on-her-father-in-law/

शुक्रवार, 2 मई 2014,  अमर उजाला, फरीदाबाद

इस पूरे मामले में आरोपी महिला के भाई ने भी उसका साथ दिया और दोनों ने मिलकर बुजुर्ग को जमकर धुना। फरीदाबाद पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग भरत लाल गांव झाड़सैतली में रहते हैं। उनके बेटे जोगेंद्र की शादी करीब आठ साल पहले मुजेसर निवासी रजनी से हुई थी।

जांच अधिकारी जैकम खान ने बताया कि शादी के बाद से दोनों परिवारों में किसी बात को लेकर विवाद चल रहा है।

बृहस्पतिवार को रजनी का भाई कैलाश अपने एक साथी के साथ रजनी को कूलर देने आया था। इसी दौरान भरत लाल और कैलाश के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। कहासुनी के बाद नौबत मारपीट तक पहुंच गई। आरोप है कि रजनी, कैलाश और उसके साथी ने मिलकर भरत लाल पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। बताया गया है कि भरत लाल के पैर की हड्डी टूट गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद तीनों घर से भाग गए। भरत लाल ने बहू रजनी, उसके भाई कैलाश व एक अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। उसका आरोप है कि मारपीट के बाद तीनों आरोपी उसके घर में रखे 4 लाख रुपये भी ले गए।  पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।

Girl posts Nude video of brother-in-law for not fullfilling demands

Nav Bharat Times, Lucknow. Date:

Nav Bharat Times, Lucknow. Date: 15.08.2014

अगर यही काम किसी लड़के ने किया होता तो पूरी महिला प्रजाति का अपमान होने के जुर्म में उसे बहुत सी कानूनी धाराओं में जेल भेज दिया गया होता । पर आरोपी लड़की है तो कानून उसके संरक्षण में उतरना लाजमी है । फिर यह बराबरी के हक का ढ़ोंग क्यों ? जब बराबरी की सजा नहीं भुगतने के लिये तैयार हो तो बराबरी का अंतर्नाद करना कितना सही है ? और इण्डिया गेट पर मोमबत्ती छाप ’वी वान्ट जस्टिस’ का गगन भेदी नाद सिर्फ महिलाओं के लिये ही प्रायोजित किया जाता है । पुरूष तो पैदा ही होता है अत्याचार करने के लिये और घुट – घुट कर कानूनों की बली चढ़ाने के लिये । उसके लिए न्याय मांगने का कार्यक्रम कौन प्रायोजित करेगा ?