सार्वजनिक उपहास / Public Humiliation

बिहार में ‘मृत’ महिला दिल्ली में प्रेमी संग जीवित मिली

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हिन्दुस्तान टाइम्स दिल्ली में दिनांक 27-12-2014 को प्रकाशित यह समाचार यह बता रहा की महिल सशक्तिकरण अब किसी निर्दोष को जेल भेजने और सामाजिक रूप से तिरस्कृत करवाने से भी बाज नहीं आ रहा है ।   इसके पूर्व भी उत्तर प्रदेश के उरई में दो बहनों की ‘हत्या’ की खबर से उपजी हिंसा में आधा शहर जला दिया गया । प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी निलम्बित हुए । लड़कियों  के पिटा ने दोनों के शवों की पहचान भी कर ली ।  बाद में दोनों बहनें दिल्ली से जीवित मिली ।
एक वाकया जौनपुर का भी है जिसमें एक लड़की की हत्या के आरोप में बाप – बेटा बाकायदा सजा पा गए  । बाद में वो लड़की मुम्बई में अपने प्रेमी के साथ मिली ।।
क्योंकि कानूनन महिलाओं को ऐसे मामलो में सजा का प्राविधान नहीं है इसलिए भारत में महिलाओ के द्वारा फर्जी मुकदमें दर्ज करा कर कानून का दुरूपयोग  और धन  उगाही की  जा रही   है  ।

कोई इंडिया गेट पर मोमबत्ती जलाने चलेगा क्या ?

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बेटी ने उठा दी बाप की ’सुपारी’ क्योंकि वह फेसबुक के बेज़ा इस्तमाल से रोकता था

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अब यह साफ हो गया है कि महिला किसी पुरुष को बलि का बकरा बना सकती है । चाहे वह पति के रूप में हो या पिता के रूप में ।

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बलात्कार के फर्जी मुकदमें में फसानें की धमकी देकर अवैध वसूली

टाइम्स आफ इण्डिया. जयपुर. 14.09.2014

टाइम्स आफ इण्डिया. जयपुर. 21.09.2014

भारत में बाकायदा बलात्कार के फर्जी मुकदमें दर्ज कराने का व्यापार चल रहा है । दिल्ली पुलिस हो, या उत्तर प्रदेश पुलिस या जयपुर पुलिस सभी जगह यह माना गया है कि हाल के वर्षों में बलात्कार की फर्जी रिर्पोट दर्ज कराने के मामलों में अशातीत इजाफा हुआ है । ऐसे में निर्दोष पुरुषों को फंसाने में जो लोग शामिल हैं उनका पुरसाहाल लेने में की न तो सरकारों को कोई फिक्र है और न ही अदालतों को । बिना सबूत, गवाह और जांच के ही पुरूष को सिर्फ धोखेबाज महिला की गवाही पर ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है । धन के साथ ही उसकी समाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक जीवन की भी हानि होती है । दस – बीस साल के अदालती भूलभुलैया के बाद यदि वह निर्दोष पुरुष मुकदमा जीत भी जाये तो क्या उसका सम्मान वापस दिलाय जा सकता है ? क्या फर्जी और झूठे मुकदमें दर्ज कराने वाली कुटिल महिलाओं को सजा मिलने का कोई कानून नहीं होना चाहिये ? ’मर्द का दर्द’ किसी ने समझा नहीं और सबने यह मान लिय कि मर्द को दर्द नहीं होता । आज फर्जी और बदले की भावना के लिखाये गये लाखों मुकदमों का दर्द देश के लाखों पुरुष भुगत रहे हैं । उनके साथ ही उनके पूरे परिवार जिसमें माता, बहन और अन्य रिश्तेदार भी शामिल हैं वो भी इस दंश के साथ घुट-घुटकर जीने को मजबूर हैं । पर वसूली के लिये झूठे मुकदमें दर्ज कराने वाली महिलाएं प्रतिदिन अपने नये शिकार की तलाश में खुले आम घूम रही हैं

बहू ने भाई के साथ मिलकर तोड़ीं ससुर की हड्डियां

http://www.delhincr.amarujala.com/feature/crime-bureau-ncr/daughter-in-law-attacks-on-her-father-in-law/

शुक्रवार, 2 मई 2014,  अमर उजाला, फरीदाबाद

इस पूरे मामले में आरोपी महिला के भाई ने भी उसका साथ दिया और दोनों ने मिलकर बुजुर्ग को जमकर धुना। फरीदाबाद पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग भरत लाल गांव झाड़सैतली में रहते हैं। उनके बेटे जोगेंद्र की शादी करीब आठ साल पहले मुजेसर निवासी रजनी से हुई थी।

जांच अधिकारी जैकम खान ने बताया कि शादी के बाद से दोनों परिवारों में किसी बात को लेकर विवाद चल रहा है।

बृहस्पतिवार को रजनी का भाई कैलाश अपने एक साथी के साथ रजनी को कूलर देने आया था। इसी दौरान भरत लाल और कैलाश के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। कहासुनी के बाद नौबत मारपीट तक पहुंच गई। आरोप है कि रजनी, कैलाश और उसके साथी ने मिलकर भरत लाल पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। बताया गया है कि भरत लाल के पैर की हड्डी टूट गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद तीनों घर से भाग गए। भरत लाल ने बहू रजनी, उसके भाई कैलाश व एक अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। उसका आरोप है कि मारपीट के बाद तीनों आरोपी उसके घर में रखे 4 लाख रुपये भी ले गए।  पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।

Girl posts Nude video of brother-in-law for not fullfilling demands

Nav Bharat Times, Lucknow. Date:

Nav Bharat Times, Lucknow. Date: 15.08.2014

अगर यही काम किसी लड़के ने किया होता तो पूरी महिला प्रजाति का अपमान होने के जुर्म में उसे बहुत सी कानूनी धाराओं में जेल भेज दिया गया होता । पर आरोपी लड़की है तो कानून उसके संरक्षण में उतरना लाजमी है । फिर यह बराबरी के हक का ढ़ोंग क्यों ? जब बराबरी की सजा नहीं भुगतने के लिये तैयार हो तो बराबरी का अंतर्नाद करना कितना सही है ? और इण्डिया गेट पर मोमबत्ती छाप ’वी वान्ट जस्टिस’ का गगन भेदी नाद सिर्फ महिलाओं के लिये ही प्रायोजित किया जाता है । पुरूष तो पैदा ही होता है अत्याचार करने के लिये और घुट – घुट कर कानूनों की बली चढ़ाने के लिये । उसके लिए न्याय मांगने का कार्यक्रम कौन प्रायोजित करेगा ?

Father using daughter to file False Rape case

नव भारत टाइम्स, लखनऊ. दिनांक : 00/08/2014

नव भारत टाइम्स, लखनऊ. दिनांक : 19/07/2014

क्या पुरूष की अस्मिता अब अस्मिता नहीं रही !

खुलेआम एक बाप अपनी बेटी को आगे कर बलात्कार का फर्जी वाद दर्ज कराना चाहता था । पुलिस की मुस्तैदी से वाद तो दर्ज नहीं हुआ । परन्तू यहाँ यह सोचने का विषय यह है कि उन लड़कों पर क्या बीतती अगर यह फर्जी मुकदमा दर्ज हो जाता ? उनकी दामन पर लगने वाले यह दाग कब छूटते और छूट भी जाते तो जीवन के उन वर्षों का क्या सिला मिलता जो इस फर्जी मुकदमें को लड़ने में बरबाद होते ? बलात्कार के फर्जी मामले दर्ज कराने में सरकार की ओर से ’पीड़िता’ को मिलने वाला मुआवजा भी एक कारक हो सकता है ?