महिला कानूनों का भय दिखाकर अवैध वसूली / Illegal Extortion on fear of Women Laws

क्या पुरूष ऐसा करके सुरक्षित रह सकते हैं ?

HH Lko 07 March 2016अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर (07.03.2016 को) लखनऊ में प्रकाशित यह खबर देखिये । सवाल यह नहीं है एक नवविवाहिता भाग गयी । सवाल यह है कि यही काम अगर किसी पुरुष ने किया होता तो उसका क्या हष्र होता ?

सबसे पहले तो दहेज और घरेलू हिन्सा के पूरे पैकेज मुकदमें दर्ज होते । उस पुरुष (पति) के सारे खानदान को जेल होती । समाज में बदनामी और लम्बी सालों – साल चलने वाली अदालती झेलनी पड़ती । गुजारा भत्ता आदि देने में वो फ़कीर बन सकता था । सारे देश के अखबार और खबरिया चैनल उसके पीछे पड़ जाते और उस पुरुष को वहशी, दरिन्दा आदि उपमाओं से सुशोभित कर देते ।

पर चूंकि यह पुनीत कार्य एक देवी जी ने किया है, उन्हे कोई सजा तो होना दूर की बात है वरन इस पर कोई कार्यवाही भी नहीं होगी । जय हो भारत की कानून और व्यवस्था । अन्धेर नगरी – चौपट राजा !

Advertisements

माताएं एवं बहिने महिला नहीं

image

Voice of underpriveledged men

Watch this video to understand some of the pain, men suffer.

राजस्थान महिला आयोग ने फ़र्जी केस के लिये दरवाजे बन्द किये

एक सरहानीय पहल ! राजस्थान महिला आयोग ने सार्वजनिक रूप से माना की महिलाओं के द्वारा फ़र्जी मुकदमें लिखाये जाते हैं । साथ ही एक जिम्मेदार संस्था के रूप में फ़र्जी केस करने वालीयों के लिये महिला आयोग के दरवाजे बन्द किये । (खबर – राजस्थान पत्रिका, 21 फ़रवरी 2016 के हवाले से)

IMG-20160221-WA0019

जब मालूम हो गया की महिला फंसा रही है तो उसे जेल क्यों नहीं भेजा ?

image

बात निकली है तो दूर तलक जायेगी

महिला उत्पीड़न के आधे से अधिक मुकदमें फ़र्जी होते हैं । यह बात जिम्मेदार पुलिस अधिकारी दिल-ही-दिल में अपने अनुभवों से जानते थे पर अब वाकई पानी सिर से ऊपर निकल गया तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी कर लिया । हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या ? जो सच है वो बाहर आकर ही रहेगा । चाहे सच को सात तालों में छुपा कर रखो, वो बाहर आ ही जाता है । पर उससे भी बड़ा दु:ख यह है कि फ़र्जी मुकदमें लिखवाने वाली ’पीड़िताओं’ को कोई सजा न मिलने के कारण ऐसे मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं ।

नई दुनिया, जयपुर में 12 फ़रवरी 2016 को छपी यह खबर देखिये ।

http://naidunia.jagran.com/state/rajasthan-husband-and-daughter-commits-suicide-after-wife-death-663952

women_oppression_rajasthan_11_02_2016

जब महिलावादियों को महिला ने पीटा

यह घटना लखनऊ के अखबरों में 13.01.2016 को छपी । यूं तो बहु के द्वारा बूढ़े सास – ससुर को  घर से निकालना और उनके मकान (समपत्ति) पर कब्जा कर लेना आम बात है । और ऐसा करने पर बहुओं को पूरा कानूनी संरक्षण प्राप्त है ।

पर घनघोर महिलावादी संगठन इस सार्वजनिक सत्य को सदैव नकारते रहते हैं । इस खबर की खास बात यह है कि ’जनवादी महिला समिति’ भी ऐसी ही प्रतिक्रिया देता रहा है । पर आज भी  यह लोग सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं होंगे कि बहुएं ही नही सास-ससुर और यहां तक की स्वयं पति भी बहुओं के हाथों प्रताड़ित होते हैं ।

Much needed gesture in present time

Supreme Court to examine possibility of Domestic Violence on Men

Rise in misuse of anti-dowry law in state worrying

image

जानते सब हैं, मानते सब हैं पर कार्यवाही कोई नहीं करेगा। सही मायनों में सरकारें, प्रशासनिक व्यवस्था और अदालतें महिलाओं के फर्जी मुकदमों को प्रोत्साहन देती हैं । उनकी रोजी रोटी सच्चे मुकदमों से तो चलती नहीं, तो फर्जी से ही चला रहे हैं । अगर यह व्यवस्था इन फर्जी पीड़िताओं पर कठोर कार्यवाही कर दे तो फर्जी मुकदमों पर अंकुश लग सकता है ।

अगर यह जिलाधिकारी न होते हो क्या सफाई देने का मौक़ा मिलता ?

image

हिंदुस्तान – लखनऊ । दिनांक 05.04.2015 ।
महिला कानूनों दुरूपयोग का यह आलम है कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है । सभी आम और ख़ास, पुरुष निशाने पर हैं । इस खबर में अगर आरोपी पुरुष जिलाधिकारी नहीं होता तो भी क्या उसे अपनी सफ़ाई देने का मौका मिलता ? जो रवायत इस देश में चल रही है उसमे तो बिना सच्चाई जाने सिर्फ आरोप मात्र लग जाने से ही पुरुषों को दोषी मान लेने का चलन है ।  नौकरी से निलम्बन, पुलिस – कचहरी के चक्कर और समाजिक तिरस्कार सब एक साथ मिलता है ।

आज कार्यालय में भी महिला कानूनों का दुरूपयोग खुलेआम हो रहा है । आफिस की हर छोटी – बड़ी बात कब ‘महिला उत्पीड़न’ और ‘कार्य स्थल पर यौनिक अत्याचार’ के मुकदमें में बदलकर लौटेगी,  इसी भय में भारत के हर कार्यालय में लोग भयाक्रांत हैं । उससे भी बड़ी समस्या यह है की जब यह मुकदमें झूठे साबित होते हैं तो फर्जी शिकायत करने वाली शातिर महिला पर कोई कार्यवाही नहीं होती । कानून में फर्जी शिकायत करने वालों पर दण्ड का प्राविधान नहीं होने की कमी के कारण महिलाओं में फर्जी मुकदमें दर्ज कराने की प्रवृत्ति की बाढ़ आ चुकी है । समाज में यह कुरीति एक विकराल रूप ले चुकी है ।