लिंग भेदी अस्मिता / Gender Discrimination in Male Assesstion

बलात्कार कानून बना अवैध धन उगाही का धन्दा !

HH Lko 12 Mar 2016

भारत देश में बलात्कार कानून अवैध धन उगाही का धन्दा बन गया है । लखनऊ के हिन्दुस्तान अखबार में 12.03.2016 को प्रकाशित यह खबर पढि़ये । महिला चाहे जितनी बार भी फ़र्जी मुकदमा लिखाये, चाहे जितने निर्दोष लोगों को फ़साये और अवैध  धन उगाही करे । पूरी कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था इस वसूली के धन्दे में उसके साथ खड़ी नजर आती है । ऐसी महिलाओं को सजा देने की मांग पर बड़े – बड़े भाग खड़े होते हैं । इसी कारण महिला कानूनों का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है और देश गर्त में जा रहा है ।

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क्या पुरूष ऐसा करके सुरक्षित रह सकते हैं ?

HH Lko 07 March 2016अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर (07.03.2016 को) लखनऊ में प्रकाशित यह खबर देखिये । सवाल यह नहीं है एक नवविवाहिता भाग गयी । सवाल यह है कि यही काम अगर किसी पुरुष ने किया होता तो उसका क्या हष्र होता ?

सबसे पहले तो दहेज और घरेलू हिन्सा के पूरे पैकेज मुकदमें दर्ज होते । उस पुरुष (पति) के सारे खानदान को जेल होती । समाज में बदनामी और लम्बी सालों – साल चलने वाली अदालती झेलनी पड़ती । गुजारा भत्ता आदि देने में वो फ़कीर बन सकता था । सारे देश के अखबार और खबरिया चैनल उसके पीछे पड़ जाते और उस पुरुष को वहशी, दरिन्दा आदि उपमाओं से सुशोभित कर देते ।

पर चूंकि यह पुनीत कार्य एक देवी जी ने किया है, उन्हे कोई सजा तो होना दूर की बात है वरन इस पर कोई कार्यवाही भी नहीं होगी । जय हो भारत की कानून और व्यवस्था । अन्धेर नगरी – चौपट राजा !

A woman can get away by paying Rs. 10000

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Shame on Indian laws and justice ! But, that’s real India!

 A woman can get away by paying only Rs. 10,000 ($145) for a serious offence of fooling the court and seeking non-admissable remdy. There is no consideration that she has even destroyed a man’s life.  This is banana justice of a banana republic.

Had it been any man doing the same, the entire world have been out to demand death penalty for him. Down with Indian laws that openly promote misuse by women. Shame once again. This news item was published at:

http://www.dnaindia.com/mumbai/report-woman-fined-rs10000-for-perjury-by-court-for-lying-under-oath-2186581

Happy Real Women’s Day !

 

Separating the REAL WOMEN from the lot!

Voice of underpriveledged men

Watch this video to understand some of the pain, men suffer.

बेटी के प्रेमी को खौलते पानी में उबालकर मार डाला

जश्न मनाओ कि एक लड़की के माता पिता ने अपने बेटी के प्रेमी को धोखे से घर बुला कर उसे अधमरा किया और फ़िर खौलते पानी में उल्टा लटाकर, उबाल कर  मार डाला । घटना उत्तर – प्रदेश के आजमगढ़ जिले की है जो कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचते – पहुंचते अखबार के अठ्ठाहरवें पन्ने पर पहुंच गयी । एक लड़का ही तो मरा है । उसकी जिन्दगी कोई मोल तो होता नहीं । इसकी जगह कोई महिला मरी होती तो देश-विदेश के अखबार और चौबीस घन्टे के खबरिया चैनल चीख – चीख के पूरा देश सिर पे ऊठा लिये होते । पुरुष के न तो कोई मानवाधिकार होते हैं और न ही उसको व्यवस्था से कोई न्याय मिलता है । यही भारत है । We want Justice चिल्लाने का एकमात्र ठेका तो महिला अधिकारों के झण्डाबदरों को मिला हुआ है ।

HH Azamgarh 28 Feb 2016HH Azamgarh 28 Feb 2016 part 2

जब मालूम हो गया की महिला फंसा रही है तो उसे जेल क्यों नहीं भेजा ?

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बात निकली है तो दूर तलक जायेगी

महिला उत्पीड़न के आधे से अधिक मुकदमें फ़र्जी होते हैं । यह बात जिम्मेदार पुलिस अधिकारी दिल-ही-दिल में अपने अनुभवों से जानते थे पर अब वाकई पानी सिर से ऊपर निकल गया तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी कर लिया । हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या ? जो सच है वो बाहर आकर ही रहेगा । चाहे सच को सात तालों में छुपा कर रखो, वो बाहर आ ही जाता है । पर उससे भी बड़ा दु:ख यह है कि फ़र्जी मुकदमें लिखवाने वाली ’पीड़िताओं’ को कोई सजा न मिलने के कारण ऐसे मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं ।

नई दुनिया, जयपुर में 12 फ़रवरी 2016 को छपी यह खबर देखिये ।

http://naidunia.jagran.com/state/rajasthan-husband-and-daughter-commits-suicide-after-wife-death-663952

women_oppression_rajasthan_11_02_2016

इस अपराध को ससुराल वालों का प्यार माना जाये !

जी सही पढ़ाआपने । यह कोई अपराध थोड़े ही है । यह तो पत्नी के मायके वालों का प्यार है । पूरे भारत में रोज के रोज पुरुषों पर महिलाओं और उनके सम्बन्धियों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है । पुरुषों को जलाना, उनपर एसिड फ़ेंकना, लिंग भंग करना और फ़र्जी मुकदमों में फ़ंसाना अब आम बात है । कोई एक – आधी खबर मीडिया के जरियें बाहर आ जाती है । पूरे प्रकरण में दुख:द बात यह है कि समाज, सरकार और न्याय व्यवस्था का रवैया इन घटनाओं के प्रति उदासीन होता है । और भारत में अपराधी महिला एवं उसके गुर्गों को सजा मिलना तो असंभव है । यह खबर हिन्दुस्तान अंबबार में दिनांक 11.01.2016 को छपी थी ।

HH Lko 11 Jan 2016

 

 

Much needed gesture in present time

Supreme Court to examine possibility of Domestic Violence on Men