crime against men

क्या इस ’अबला नारी’ पर कोई कानून वाला कार्यवाही करने की हिम्मत करेगा ?

मोहतरमा पहले से ही शादी-शुदा थी और फिर भी एक ’नया बकरा’ हलाल करने निकल पड़ी । आज यह बहुत ही आम बात है, जिसमें महिलाएं एक से अधिक शादियां कर रही हैं । वो भी बिना पूर्व तलाक लिये हुये । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के कानून (आई.पी.सी.) में ऐसी महिला अपराधियों को सजा देने का कोई प्राविधान नहीं है । अलबत्ता, इस महिला अपराधी के ’नये पति’ को सजा का प्राविधान जरूर है । अब कपट करे ’अबला महिला’ और सजा पाये बेचारा ’निर्दोष पुरुष’ । न पुलिस, न अदालते और न समाज – ऐसी महिला अपराधियों को कोई सजा दिलवाने के लिये पहल नहीं करता ।

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अब भी सबूत चाहिये महिला कानूनों के दुरूपयोग का ?

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यह कौन सा कानून है जिसमे घर परिवार को बर्बाद करने का काम किया जाता है | क्या माँ – बाप को अपने साथ रखना कानूनन जुर्म है ? जिसके लिए फर्जी मुकदमों में जेल भेजने की घमकियाँ मिलती रहे ? क्या यही है असली महिला सशक्तिकरण  ? हर छोटी बडी बात पर  दहेज और घरेलु हिंसा में फंसाने की धमकी ।  और जाने लाखों गुमनाम लोग रोज तिल – तिल कर मर रहे हैं । जिसके ऊपर से यह तुर्रा की मर्द को दर्द  नही होता । महिला कानूनों के दुरुपयोग के रथ पर सवार हो रहे इस छ्द्म सशक्तिकरण का जो भी अंत होगा वो तो समय बतायेगा पर दु:ख यह है कि न जाने कितने ही पुरुष रोज अपने प्राण त्याग रहे हैं और उनके परिवार एक अनजाने भय के साये में रोज मर रहे हैं ।

पुरुषों को अपराधी बनाने वाले कानूनों को समाप्त करने का समय आ गया है

पुरुषों को अपराधी बनाने वाले कानूनों को समाप्त करने का समय आ गया है । इस लेख के माध्यम से इस बात को समाज की मुख्यधारा में उठाने का प्रयास किया गया है कि भारतीय दंड विधान के 498ए और घरेलू हिन्सा कानून की वजह से पुरुषों को अपराघी बनाया जा रहा है । चूंकि इनका व्यापाक पैमाने पर दुरुपयोग रहा है इसलिये इसे समाप्त करने की जरूरत है । बताते चलें की इस लेख के मूल में हैदराबाद निवासी प्रो. गुरुप्रसाद की अपने दोनों बेटों को मारकर स्वयं भी आत्महत्या करने की घटना रहा है । प्रो. गुरुप्रसाद का पत्नी से तलाक का मुकदमा चल रहा था । जिसके बीच उन पर दहेज उत्पीड़न का फर्जी मुकदमा भी दर्ज कराया गया । मरने से पूर्व अपने सूसाईड नोट में प्रो. गुरुप्रसाद ने केन्द्रीय गृह मन्त्री जो पत्र लिखकर इन कानूनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने का अनुरोध किया था । साथ ही वह लिख कर गये हैं कि इन जान लेवा कानूनों से तंग आकर वे आत्म हत्या कर रहें हैं । साथ ही बताते चलें कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 65000 पुरुष इन कानूनों से तंग आकर अपनी जान ले रहे हैं  ।

http://ibnlive.in.com/news/time-to-scrap-laws-which-turn-ordinary-men-into-criminals/505162-3.html