Crime Agaisnt Men

जब मालूम हो गया की महिला फंसा रही है तो उसे जेल क्यों नहीं भेजा ?

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बात निकली है तो दूर तलक जायेगी

महिला उत्पीड़न के आधे से अधिक मुकदमें फ़र्जी होते हैं । यह बात जिम्मेदार पुलिस अधिकारी दिल-ही-दिल में अपने अनुभवों से जानते थे पर अब वाकई पानी सिर से ऊपर निकल गया तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी कर लिया । हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या ? जो सच है वो बाहर आकर ही रहेगा । चाहे सच को सात तालों में छुपा कर रखो, वो बाहर आ ही जाता है । पर उससे भी बड़ा दु:ख यह है कि फ़र्जी मुकदमें लिखवाने वाली ’पीड़िताओं’ को कोई सजा न मिलने के कारण ऐसे मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं ।

नई दुनिया, जयपुर में 12 फ़रवरी 2016 को छपी यह खबर देखिये ।

http://naidunia.jagran.com/state/rajasthan-husband-and-daughter-commits-suicide-after-wife-death-663952

women_oppression_rajasthan_11_02_2016

इस अपराध को ससुराल वालों का प्यार माना जाये !

जी सही पढ़ाआपने । यह कोई अपराध थोड़े ही है । यह तो पत्नी के मायके वालों का प्यार है । पूरे भारत में रोज के रोज पुरुषों पर महिलाओं और उनके सम्बन्धियों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है । पुरुषों को जलाना, उनपर एसिड फ़ेंकना, लिंग भंग करना और फ़र्जी मुकदमों में फ़ंसाना अब आम बात है । कोई एक – आधी खबर मीडिया के जरियें बाहर आ जाती है । पूरे प्रकरण में दुख:द बात यह है कि समाज, सरकार और न्याय व्यवस्था का रवैया इन घटनाओं के प्रति उदासीन होता है । और भारत में अपराधी महिला एवं उसके गुर्गों को सजा मिलना तो असंभव है । यह खबर हिन्दुस्तान अंबबार में दिनांक 11.01.2016 को छपी थी ।

HH Lko 11 Jan 2016

 

 

क्या जज साहब की हिम्मत है इस महिला को दण्ड देने की ?

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जहां पिता द्वारा बालिग़ लड़की को अपनी मर्जी से शादी करने से रोकना गलत । अगर शादी कर ली तो उसके पति पर फर्जी मुकदमा करना भी गलत । और सुप्रीम कोर्ट में चप्पल बाजी उन सबसे गलत ।

सवाल सिर्फ इतना है की पिता – पुत्री की उठा -पटक में बेचारा पति क्यों पिसे ? जेल जाए ? मुकदमा लड़े ? पुलिस में और अदालतों में रुपया खर्च करे ?

जज साहब, क्या इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए ? है आपमें वो दम जो इस बेबस पुरुष को न्याया दिला सके ?

Much needed gesture in present time

Supreme Court to examine possibility of Domestic Violence on Men

अब कार्यक्षेत्र में भी महिला कानूनों का दुरुपयोग

किसी महिला को काम पर रखने से पहले दस बार सोंचे । किसी दिन छुट्टी न देने पर या वेतन न बढ़ाने पर नियोक्ता पर महिला उतपीड़न का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया ज सकता है । यकीन न हो तो हिन्दुस्तान (हिन्दी), लखनऊ में छपी इस खबर को देखिये ।  अगर किसी महिला को नौकरी पर रखा जाता है तो किसी दिन छुट्टी न मिलने पर या वेतन नहीं बढ़ाये जाने पर नियोक्ता के उपर महिला उप्त्पीड़न और यौन शोषण के सोचें – समझे  फर्जी मुकदमें दर्ज हो सकतें हैं ।

किसी महिला को काम पर रखने से पहले दस बार सोंचे । किसी दिन छुट्टी न देने पर या वेतन न बढ़ाने पर नियोक्ता पर महिला उतपीड़न का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया ज सकता है ।

लड़कियां OLX पर बेच रही ब्वायफ्रेन्ड !

नव भारत टाइम्स, लखनऊ, 12.11.2014

नव भारत टाइम्स, लखनऊ, 12.11.2014

अगर यही काम किसी लड़के ने किया होता हो सभी महिल संगठन सड़कों पर उतर आते कि लड़कियां बेची जा रही हैं । तमाम धरना – प्रदर्शन आदि शुरु हो जाते ।और हमारे देश की कर्मठ पुलिस उस लड़के को, और उसके दिवंगत पुरखों तक पर मुकदमा दर्ज हो गया होता । पर यही अपराध जब किसी महिला ने किया तो उसके साथ उदार बर्ताव क्यों ? #EqualPunishmentForEqualCrime की बात बराबरी के झण्डाबदरों के गले क्यों नहीं उतर रझीं>

परन्तु पुरुषों को बेचा जाना क्या कानूनन अपराध नहीं है ? इस पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ? लड़कों की अस्मिता का कोई मोल नहीं है ।

31 वर्ष की महिला ने 14 वर्ष के छात्र को शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिये धमकाया

समाज बदल रहा है और समाजिक सच्चाईयाँ भी । साहित्य को समाज का दर्पण माना जाता है और फिल्में भी साहित्य होती हैं । “बी.ए. पास’ फिल्म में जो दिखाया गया वह समाज में व्याप्त है ।  समस्या यह है कि कानून अभी भी अंग्रेजों के जमाने का है । जिसमें महिलाओं को अभी सजा के लिये पात्र नहीं माना जाता है । जब बराबर के काम के लिये बराबर की पगार के लिये आन्दोलन हुआ था तो बराबर के अपराध के लिये बराबर की सजा के लिये क्यों नहीं ?

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http://timesofindia.indiatimes.com/city/ludhiana/Woman-booked-for-sexually-exploiting-minor-boy-in-Ludhiana/articleshow/44878264.cms

LUDHIANA: A 31-year-old woman was booked here on Sunday for allegedly sexually exploiting and blackmailing a minor boy, who used to take tuitions from her, police said. The victim is a class eight student and his family lives as a tenant in a house owned by the father of the accused, they said.

The woman allegedly forced the 14-year-old boy into having physical relationship with her, they said. The woman threatened to kill the boy if he did not meet her demand. She also made a video and started blackmailing the boy, SHO Dharm Pal said, adding, this continued for several months.

Later, the victim told about the entire case to his father, who then approached the police. A case under various sections of the Protection of Children from Sexual Offences Act 2012 (POCSO) has been registered against the woman today, police said, adding, the accused was absconding. The police have taken possession of the objectionable video and further investigation in the case is on.