Crime has no Gender / अपराधी का कोई लैंगिक आधार नहीं

Happy Real Women’s Day !

 

Separating the REAL WOMEN from the lot!

राजस्थान महिला आयोग ने फ़र्जी केस के लिये दरवाजे बन्द किये

एक सरहानीय पहल ! राजस्थान महिला आयोग ने सार्वजनिक रूप से माना की महिलाओं के द्वारा फ़र्जी मुकदमें लिखाये जाते हैं । साथ ही एक जिम्मेदार संस्था के रूप में फ़र्जी केस करने वालीयों के लिये महिला आयोग के दरवाजे बन्द किये । (खबर – राजस्थान पत्रिका, 21 फ़रवरी 2016 के हवाले से)

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महिला के हाथों एक पुरूष मरा है, जशन मनाओ!

फ़िर चहका फ़र्जी महिला उत्थान, जाती है तो जाये, पुरुष की जान ।
 
आओ जशन मनाएं । एक पुरुष मरा है, वो भी महिला कानूनों के दुरुपयोग के कारण । फ़र्जी दहेज के मुकदमें की धमकी के कारण आत्महत्या करने वाले इस पुरूष की मौत की ’रिपोर्ट’ भी यदि पुलिस दर्ज कर ले तो बड़ी बात होगी । खबर – दैनिक जागरण, कानपुर के हवाले से – दिनांक 17 फ़रवरी 2016 को प्रकाशित |
Dainik Jagran Kanpur 17 Feb 2016

इस अपराध को ससुराल वालों का प्यार माना जाये !

जी सही पढ़ाआपने । यह कोई अपराध थोड़े ही है । यह तो पत्नी के मायके वालों का प्यार है । पूरे भारत में रोज के रोज पुरुषों पर महिलाओं और उनके सम्बन्धियों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है । पुरुषों को जलाना, उनपर एसिड फ़ेंकना, लिंग भंग करना और फ़र्जी मुकदमों में फ़ंसाना अब आम बात है । कोई एक – आधी खबर मीडिया के जरियें बाहर आ जाती है । पूरे प्रकरण में दुख:द बात यह है कि समाज, सरकार और न्याय व्यवस्था का रवैया इन घटनाओं के प्रति उदासीन होता है । और भारत में अपराधी महिला एवं उसके गुर्गों को सजा मिलना तो असंभव है । यह खबर हिन्दुस्तान अंबबार में दिनांक 11.01.2016 को छपी थी ।

HH Lko 11 Jan 2016

 

 

क्या जज साहब की हिम्मत है इस महिला को दण्ड देने की ?

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जहां पिता द्वारा बालिग़ लड़की को अपनी मर्जी से शादी करने से रोकना गलत । अगर शादी कर ली तो उसके पति पर फर्जी मुकदमा करना भी गलत । और सुप्रीम कोर्ट में चप्पल बाजी उन सबसे गलत ।

सवाल सिर्फ इतना है की पिता – पुत्री की उठा -पटक में बेचारा पति क्यों पिसे ? जेल जाए ? मुकदमा लड़े ? पुलिस में और अदालतों में रुपया खर्च करे ?

जज साहब, क्या इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए ? है आपमें वो दम जो इस बेबस पुरुष को न्याया दिला सके ?

इस अबला कैदी के आगे सभी नत – मस्तक हैं

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नवभारत टाइम्स, लखनऊ में दिनांक 15-04-2015 को प्रकाशित इस खबर का मुलाहिजा कीजिये । देखिये कैसे एक अबला नारी ‘डान-गिरी’ के आगे पूरी जेल व्यवस्था ध्वस्त है । आखिर सशक्तिकरण की बयार जेल तक क्यों न पहुंचे ? है किसी ओरिजिनल माई के लाल में हिम्मत जो मैडम की अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा सके । अगर आपने ओरिजिनल माँ का दूध पीया हो जेल विभाग से इनाम मिलना पक्का ।

वो सूत्र याद आ रहा है – यत्र नारि पूज्यते … 
प्रणाम देवी ।