Murder of Men

बेटी के प्रेमी को खौलते पानी में उबालकर मार डाला

जश्न मनाओ कि एक लड़की के माता पिता ने अपने बेटी के प्रेमी को धोखे से घर बुला कर उसे अधमरा किया और फ़िर खौलते पानी में उल्टा लटाकर, उबाल कर  मार डाला । घटना उत्तर – प्रदेश के आजमगढ़ जिले की है जो कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचते – पहुंचते अखबार के अठ्ठाहरवें पन्ने पर पहुंच गयी । एक लड़का ही तो मरा है । उसकी जिन्दगी कोई मोल तो होता नहीं । इसकी जगह कोई महिला मरी होती तो देश-विदेश के अखबार और चौबीस घन्टे के खबरिया चैनल चीख – चीख के पूरा देश सिर पे ऊठा लिये होते । पुरुष के न तो कोई मानवाधिकार होते हैं और न ही उसको व्यवस्था से कोई न्याय मिलता है । यही भारत है । We want Justice चिल्लाने का एकमात्र ठेका तो महिला अधिकारों के झण्डाबदरों को मिला हुआ है ।

HH Azamgarh 28 Feb 2016HH Azamgarh 28 Feb 2016 part 2

पुरानी मांगो को दहेज के लिये हत्या नहीं माना जायेगा – सुप्रीम कोर्ट

दैनिक हिन्दुस्तान में दिनांक 17 फ़रवरी 2016 को छपी यह खबर अपनी चुगली खुद कर रही है । सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि हर केस जहां लड़की की मौत हो गयी हो उसे दहेज के लिये हत्या नहीं माना जायेगा । जिस प्रकार महिला कानूनों का खुले आम दुरुपयोग हो रहा है, उसके कारण यह एक महत्वपूर्ण फ़ैसला है । हत्या, के ठीक पहले की गयी दहेज की मांग को ही ’दहेज – हत्या’ (भारतीय दण्ड विधान की धारा 304बी) का कारण माना जायेगा ।

 HH LKo 17 Feb 2016

महिला के हाथों एक पुरूष मरा है, जशन मनाओ!

फ़िर चहका फ़र्जी महिला उत्थान, जाती है तो जाये, पुरुष की जान ।
 
आओ जशन मनाएं । एक पुरुष मरा है, वो भी महिला कानूनों के दुरुपयोग के कारण । फ़र्जी दहेज के मुकदमें की धमकी के कारण आत्महत्या करने वाले इस पुरूष की मौत की ’रिपोर्ट’ भी यदि पुलिस दर्ज कर ले तो बड़ी बात होगी । खबर – दैनिक जागरण, कानपुर के हवाले से – दिनांक 17 फ़रवरी 2016 को प्रकाशित |
Dainik Jagran Kanpur 17 Feb 2016

इस अपराध को ससुराल वालों का प्यार माना जाये !

जी सही पढ़ाआपने । यह कोई अपराध थोड़े ही है । यह तो पत्नी के मायके वालों का प्यार है । पूरे भारत में रोज के रोज पुरुषों पर महिलाओं और उनके सम्बन्धियों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है । पुरुषों को जलाना, उनपर एसिड फ़ेंकना, लिंग भंग करना और फ़र्जी मुकदमों में फ़ंसाना अब आम बात है । कोई एक – आधी खबर मीडिया के जरियें बाहर आ जाती है । पूरे प्रकरण में दुख:द बात यह है कि समाज, सरकार और न्याय व्यवस्था का रवैया इन घटनाओं के प्रति उदासीन होता है । और भारत में अपराधी महिला एवं उसके गुर्गों को सजा मिलना तो असंभव है । यह खबर हिन्दुस्तान अंबबार में दिनांक 11.01.2016 को छपी थी ।

HH Lko 11 Jan 2016

 

 

पति की हत्या से पूरा होता महिला सशक्तिरकण

Nav Bharat Times 08.10.2014

Nav Bharat Times 08.10.2014

इस हत्याकांड में भी पुलिस ने पत्नी को ही दोषी पाया । जब पुरुष की जान गयी तो कोईं न्याय की मांग क्यों नहीं कर रहा है ? क्या पुरुष की मौत रोने भर को भी नहीं है ? करोड़पति से लेकर मजदूर और राज मिस्त्री तक, सभी वर्गों की महिलाओं का सशकितकरण पति को मारकर ही पूरा होता है । सबसे गौर तलब बात यह है कि बहुधा ऐसे मामलों में अपराधी महिला को सजा नहीं होती या बहुत कम सजा से काम चलाया जाता है ।

दो करोड़ के लिये पति की जान लेना फायदे का सौदा है

Wife gets Husband killed to get two crore rupees

दैनिक जागरण एवं हिन्दुस्तान (हिन्दी)अलीगढ़ 07.10.2014

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खुद अवैध सन्बन्धों के लिये पति से पैसे लेकर प्रेमी के हाथ पति की ’सुपारी’ उठा दी !

हिन्दुस्तान टाइम्स. दिल्ली. 06.10.2014

हिन्दुस्तान टाइम्स. दिल्ली. 06.10.2014

महिला सश्क्तिकरण के नये युग का सुत्रपात हो चुका है । जिस पति के अन्य महिलाओं के साथ सम्बन्ध होने पर आपत्ति थी उसी से पैसे लेकर अपने प्रेमी के हाथों पत्नी ने पति की सुपारी उठा दी । जाहिर है पति महोदय को इस अवैध सम्बन्ध पर आपत्ति थी।  खबर क्योंकि दिल्ली से है इसलिये प्रमुखता से छप भी पायी नहीं तो छोटे शहरों में ऐसी घटनाओं को कौन सा अखबार छापता है ? पर जाको राखे सांईया, मार सके न कोई वाली बात को चरितार्थ करते हुए, सिर में दो गोली लगने के बाद भी पति महोदय जीवित बच गये । अब सवाल यह है कि क्या इस महान पतिव्रता महिला को सजा मिल पायेगी ? भारत की पुलिस, कानून और अदालते महिला अपराधियों पर बहुत दयावाल और मेहरबान रहती है । फिर भी आशा पर दुनिया कायम है । वैसे तो पुरुष को न्याय मिलाना एक बहुत ही मुश्किल काम है पर फिर भी जोर से बोलो ” वी वान्ट जस्टिस” !