Punish Women Offenders

Much needed gesture in present time

Supreme Court to examine possibility of Domestic Violence on Men

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क्या इस ’अबला नारी’ पर कोई कानून वाला कार्यवाही करने की हिम्मत करेगा ?

मोहतरमा पहले से ही शादी-शुदा थी और फिर भी एक ’नया बकरा’ हलाल करने निकल पड़ी । आज यह बहुत ही आम बात है, जिसमें महिलाएं एक से अधिक शादियां कर रही हैं । वो भी बिना पूर्व तलाक लिये हुये । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के कानून (आई.पी.सी.) में ऐसी महिला अपराधियों को सजा देने का कोई प्राविधान नहीं है । अलबत्ता, इस महिला अपराधी के ’नये पति’ को सजा का प्राविधान जरूर है । अब कपट करे ’अबला महिला’ और सजा पाये बेचारा ’निर्दोष पुरुष’ । न पुलिस, न अदालते और न समाज – ऐसी महिला अपराधियों को कोई सजा दिलवाने के लिये पहल नहीं करता ।

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लड़कियां OLX पर बेच रही ब्वायफ्रेन्ड !

नव भारत टाइम्स, लखनऊ, 12.11.2014

नव भारत टाइम्स, लखनऊ, 12.11.2014

अगर यही काम किसी लड़के ने किया होता हो सभी महिल संगठन सड़कों पर उतर आते कि लड़कियां बेची जा रही हैं । तमाम धरना – प्रदर्शन आदि शुरु हो जाते ।और हमारे देश की कर्मठ पुलिस उस लड़के को, और उसके दिवंगत पुरखों तक पर मुकदमा दर्ज हो गया होता । पर यही अपराध जब किसी महिला ने किया तो उसके साथ उदार बर्ताव क्यों ? #EqualPunishmentForEqualCrime की बात बराबरी के झण्डाबदरों के गले क्यों नहीं उतर रझीं>

परन्तु पुरुषों को बेचा जाना क्या कानूनन अपराध नहीं है ? इस पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ? लड़कों की अस्मिता का कोई मोल नहीं है ।

31 वर्ष की महिला ने 14 वर्ष के छात्र को शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिये धमकाया

समाज बदल रहा है और समाजिक सच्चाईयाँ भी । साहित्य को समाज का दर्पण माना जाता है और फिल्में भी साहित्य होती हैं । “बी.ए. पास’ फिल्म में जो दिखाया गया वह समाज में व्याप्त है ।  समस्या यह है कि कानून अभी भी अंग्रेजों के जमाने का है । जिसमें महिलाओं को अभी सजा के लिये पात्र नहीं माना जाता है । जब बराबर के काम के लिये बराबर की पगार के लिये आन्दोलन हुआ था तो बराबर के अपराध के लिये बराबर की सजा के लिये क्यों नहीं ?

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http://timesofindia.indiatimes.com/city/ludhiana/Woman-booked-for-sexually-exploiting-minor-boy-in-Ludhiana/articleshow/44878264.cms

LUDHIANA: A 31-year-old woman was booked here on Sunday for allegedly sexually exploiting and blackmailing a minor boy, who used to take tuitions from her, police said. The victim is a class eight student and his family lives as a tenant in a house owned by the father of the accused, they said.

The woman allegedly forced the 14-year-old boy into having physical relationship with her, they said. The woman threatened to kill the boy if he did not meet her demand. She also made a video and started blackmailing the boy, SHO Dharm Pal said, adding, this continued for several months.

Later, the victim told about the entire case to his father, who then approached the police. A case under various sections of the Protection of Children from Sexual Offences Act 2012 (POCSO) has been registered against the woman today, police said, adding, the accused was absconding. The police have taken possession of the objectionable video and further investigation in the case is on.

बधाई हो ! अब नये शिकार की तलाश में निकलेगी यह बेचारी ’अबला’

हिन्दुस्तान. लखनऊ दिनांक 12.10.2014

हिन्दुस्तान. लखनऊ दिनांक 12.10.2014

यह तो सोने पे सुहागा वाली बात हो गयी । करवा चौथ के दिन जब दोनों से छुटकारा मिल जाये तो इससे बढ़िया क्या हो सकता है ? पति की सम्पत्ति पर बिर्बाध कब्जा करो । जोकि उसके जिन्दा रहते अवैध सम्बधों के चलते संभव न हो पाता । और प्रेमी तो बहुत मिल जायेंगे । यह सशक्तिकरण की बलिहारी है कि कानूनों में महिला को अन्य पुरुष के साथ सम्बन्ध रखने पर कोई सजा नहीं है । परन्तु अगर पति के बारे में झूठे आरोप भी लगा दे तो उसके पुश्तों तक तो पुलिस जेल में ठूसे देगी और कानून उसको अपराधी मानते हुये ही कार्यवाही करेगा ।

पति की हत्या से पूरा होता महिला सशक्तिरकण

Nav Bharat Times 08.10.2014

Nav Bharat Times 08.10.2014

इस हत्याकांड में भी पुलिस ने पत्नी को ही दोषी पाया । जब पुरुष की जान गयी तो कोईं न्याय की मांग क्यों नहीं कर रहा है ? क्या पुरुष की मौत रोने भर को भी नहीं है ? करोड़पति से लेकर मजदूर और राज मिस्त्री तक, सभी वर्गों की महिलाओं का सशकितकरण पति को मारकर ही पूरा होता है । सबसे गौर तलब बात यह है कि बहुधा ऐसे मामलों में अपराधी महिला को सजा नहीं होती या बहुत कम सजा से काम चलाया जाता है ।

दो करोड़ के लिये पति की जान लेना फायदे का सौदा है

Wife gets Husband killed to get two crore rupees

दैनिक जागरण एवं हिन्दुस्तान (हिन्दी)अलीगढ़ 07.10.2014

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खुद अवैध सन्बन्धों के लिये पति से पैसे लेकर प्रेमी के हाथ पति की ’सुपारी’ उठा दी !

हिन्दुस्तान टाइम्स. दिल्ली. 06.10.2014

हिन्दुस्तान टाइम्स. दिल्ली. 06.10.2014

महिला सश्क्तिकरण के नये युग का सुत्रपात हो चुका है । जिस पति के अन्य महिलाओं के साथ सम्बन्ध होने पर आपत्ति थी उसी से पैसे लेकर अपने प्रेमी के हाथों पत्नी ने पति की सुपारी उठा दी । जाहिर है पति महोदय को इस अवैध सम्बन्ध पर आपत्ति थी।  खबर क्योंकि दिल्ली से है इसलिये प्रमुखता से छप भी पायी नहीं तो छोटे शहरों में ऐसी घटनाओं को कौन सा अखबार छापता है ? पर जाको राखे सांईया, मार सके न कोई वाली बात को चरितार्थ करते हुए, सिर में दो गोली लगने के बाद भी पति महोदय जीवित बच गये । अब सवाल यह है कि क्या इस महान पतिव्रता महिला को सजा मिल पायेगी ? भारत की पुलिस, कानून और अदालते महिला अपराधियों पर बहुत दयावाल और मेहरबान रहती है । फिर भी आशा पर दुनिया कायम है । वैसे तो पुरुष को न्याय मिलाना एक बहुत ही मुश्किल काम है पर फिर भी जोर से बोलो ” वी वान्ट जस्टिस” !

महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में माना की बलात्कार की आधी घटनाएं फर्जी !

अब भी सबूत चाहिये की महिलाएं फर्जी मुकदमें दर्ज कराती हैं ? ऐसी महिलाओं को सजा क्यों नहीं ?

अब भी सबूत चाहिये की महिलाएं फर्जी मुकदमें दर्ज कराती हैं ? ऐसी महिलाओं को सजा क्यों नहीं ?

बलात्कार के फर्जी मुकदमें में फसानें की धमकी देकर अवैध वसूली

टाइम्स आफ इण्डिया. जयपुर. 14.09.2014

टाइम्स आफ इण्डिया. जयपुर. 21.09.2014

भारत में बाकायदा बलात्कार के फर्जी मुकदमें दर्ज कराने का व्यापार चल रहा है । दिल्ली पुलिस हो, या उत्तर प्रदेश पुलिस या जयपुर पुलिस सभी जगह यह माना गया है कि हाल के वर्षों में बलात्कार की फर्जी रिर्पोट दर्ज कराने के मामलों में अशातीत इजाफा हुआ है । ऐसे में निर्दोष पुरुषों को फंसाने में जो लोग शामिल हैं उनका पुरसाहाल लेने में की न तो सरकारों को कोई फिक्र है और न ही अदालतों को । बिना सबूत, गवाह और जांच के ही पुरूष को सिर्फ धोखेबाज महिला की गवाही पर ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है । धन के साथ ही उसकी समाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक जीवन की भी हानि होती है । दस – बीस साल के अदालती भूलभुलैया के बाद यदि वह निर्दोष पुरुष मुकदमा जीत भी जाये तो क्या उसका सम्मान वापस दिलाय जा सकता है ? क्या फर्जी और झूठे मुकदमें दर्ज कराने वाली कुटिल महिलाओं को सजा मिलने का कोई कानून नहीं होना चाहिये ? ’मर्द का दर्द’ किसी ने समझा नहीं और सबने यह मान लिय कि मर्द को दर्द नहीं होता । आज फर्जी और बदले की भावना के लिखाये गये लाखों मुकदमों का दर्द देश के लाखों पुरुष भुगत रहे हैं । उनके साथ ही उनके पूरे परिवार जिसमें माता, बहन और अन्य रिश्तेदार भी शामिल हैं वो भी इस दंश के साथ घुट-घुटकर जीने को मजबूर हैं । पर वसूली के लिये झूठे मुकदमें दर्ज कराने वाली महिलाएं प्रतिदिन अपने नये शिकार की तलाश में खुले आम घूम रही हैं