Women Offenders

बहू ने भाई के साथ मिलकर तोड़ीं ससुर की हड्डियां

http://www.delhincr.amarujala.com/feature/crime-bureau-ncr/daughter-in-law-attacks-on-her-father-in-law/

शुक्रवार, 2 मई 2014,  अमर उजाला, फरीदाबाद

इस पूरे मामले में आरोपी महिला के भाई ने भी उसका साथ दिया और दोनों ने मिलकर बुजुर्ग को जमकर धुना। फरीदाबाद पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग भरत लाल गांव झाड़सैतली में रहते हैं। उनके बेटे जोगेंद्र की शादी करीब आठ साल पहले मुजेसर निवासी रजनी से हुई थी।

जांच अधिकारी जैकम खान ने बताया कि शादी के बाद से दोनों परिवारों में किसी बात को लेकर विवाद चल रहा है।

बृहस्पतिवार को रजनी का भाई कैलाश अपने एक साथी के साथ रजनी को कूलर देने आया था। इसी दौरान भरत लाल और कैलाश के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। कहासुनी के बाद नौबत मारपीट तक पहुंच गई। आरोप है कि रजनी, कैलाश और उसके साथी ने मिलकर भरत लाल पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। बताया गया है कि भरत लाल के पैर की हड्डी टूट गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद तीनों घर से भाग गए। भरत लाल ने बहू रजनी, उसके भाई कैलाश व एक अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। उसका आरोप है कि मारपीट के बाद तीनों आरोपी उसके घर में रखे 4 लाख रुपये भी ले गए।  पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।

Advertisements

Female medical student files fake rape case on former boyfriend

NAV BHARAT TIMES, Lucknow. Date: 15.08.2014

NAV BHARAT TIMES, Lucknow. Date: 15.08.2014

प्यार में दिल टूटा तो पूर्व प्रेमी पर लगा दिया बलात्कार का आरोप ! भई वाह ! यही है असली इण्डिया ? जांच हुई लड़का बरी हुआ । पर उसकी अस्मिता और सुरक्षा का कोई मोल नहीं । फर्जी  आरोप लगाने वाली लड़की को कोई सजा क्यों नहीं ? झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाली महिलाओं की पहचान एक महिला की तरह छुपाने का क्या मतलब ? उन्हे भी एक अपराधी के समान समाज के सामने क्यों नहीं पेश किया जाता ?

Girl posts Nude video of brother-in-law for not fullfilling demands

Nav Bharat Times, Lucknow. Date:

Nav Bharat Times, Lucknow. Date: 15.08.2014

अगर यही काम किसी लड़के ने किया होता तो पूरी महिला प्रजाति का अपमान होने के जुर्म में उसे बहुत सी कानूनी धाराओं में जेल भेज दिया गया होता । पर आरोपी लड़की है तो कानून उसके संरक्षण में उतरना लाजमी है । फिर यह बराबरी के हक का ढ़ोंग क्यों ? जब बराबरी की सजा नहीं भुगतने के लिये तैयार हो तो बराबरी का अंतर्नाद करना कितना सही है ? और इण्डिया गेट पर मोमबत्ती छाप ’वी वान्ट जस्टिस’ का गगन भेदी नाद सिर्फ महिलाओं के लिये ही प्रायोजित किया जाता है । पुरूष तो पैदा ही होता है अत्याचार करने के लिये और घुट – घुट कर कानूनों की बली चढ़ाने के लिये । उसके लिए न्याय मांगने का कार्यक्रम कौन प्रायोजित करेगा ?